Indore Dil Se
News & Infotainment Web Channel

पत्थर

1,099

पत्थरों को पूजते पूजते अब तक रे मन..
क्यों नही पत्थर हुआ तू रे…
जग की विद्रूप हंसी के सम्मुख…
व्यंग बाणों के आमुख…
क्यों नही पत्थर हुआ तू रे…
क्यों अलापता बेसुरे राग रे मन…
क्यों सिसकता बंद पंछी सा रे मन…
क्यों नही पत्थर हुआ तू रे…
हिमखंड सा कतरा कतरा पिघलता रे मन…
क्यों नही पत्थर हुआ तू रे…

Author: Jyotsna Saxena (ज्योत्सना सक्सेना)

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Contact to Listing Owner

Captcha Code