वह नन्हा पंछी
बूढ़े पेड़ के पास का पोखर
सूखा था कल तक ,
रात के सन्नाटे में
सुनकर पुकार दर्द से विव्हल पंछी की
चाँद के आँसू बहे जब ओस बनकर
सुबह देखा तो
पोखर लबालब भरा हुआ था पानी से.
ओट में सूखे पत्तों की
तिनकों से बने एक जर्जर-से घोंसले में
ठिठुरता हुआ…
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