एक हरी खाकी वर्दी की चीख
मैं नहीं जानता ;क्या कहते है मेरे देश के लोग ,
क्यूंकि मेरे लिए कोई नहीं जाता इंडिया गेट , कैंडल लिए
क्या लिखते हैं अखबार , क्या चीखते है टीवी के लोग;
क्यूंकि मानसिक रूप से विकसित लोग बहस नहीं करते ,मेरे लिए ,
वर्दियों से राशन तक , गोलियों…
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